Thursday, November 17, 2011

चाहत



हजारों झूठ बोले हैं मैनें तुम्से,
आज एक सच कहने को जी चाहता है।
थक गया हूँ भागते-भागते अपने आप से,
कुछ देर रूक कर सोने को जी चाहता है।
साफ पानी मे देखना चाहता हूँ खुद को,
चेहरे पर जमी काई को धोने को जी चाहता है।
ऊब गया हूँ झूठी हंसी हंसते-हंसते,
अब तो कुछ देर रोने को जी चाहता है।
लोगों से सुना है बहुत खुबसूरत होती है जिदंगी,
इसलिए थोङा सा जीने को जी चाहता है।
जानता हूँ कि कभी ना पा सकुंगा तुम्को,
फिर भी ना जाने क्यों तुम्हे अपना कहने को जी चाहता है।





Saturday, October 29, 2011

: अकेलापन

अकेलापन: अकेलापन क्या तुम्हे पता है कि अकेलापन क्या होता है ? जब अपनी ही रूह़ पर उभरे छालों से दर्द सा रिसता है। मौत के इंतजार में इंसान हर पल मरता...

अकेलापन


अकेलापन

क्या तुम्हे पता है कि अकेलापन क्या होता है?
जब अपनी ही रूह़ पर उभरे छालों से
दर्द सा रिसता है।
मौत के इंतजार में
इंसान हर पल मरता है।
खुद की ही चीखें
जब गुँजती हैं कानों में।
और चाँद का किरकिरापन
चुभने लगता है आँखों मे।
ऐसा होता है अकेलापन।।

जब तन्हाई होती है चारों ओर,
खामोशी के आगोश में सुनता है तो कुछ
बस अपनी ही कराहों का शोर।
जब नफ़रत हो जाती है
भगवान से।
और ङर लगने लगता है
अपने ही नाम से।
ऐसा होता है अकेलापन।।

तुम सोचते होगे कि- मुझे कैसे पता ?
मैने ये अकेलापन सिर्फ महसूस ही नही किया
बल्कि जिया है।
किसी के दिल का ही नहीं, अपनी ही आत्मा का खून भी
अपने ही हाथों से किय़ा है।

तुमने देखा है ना आसमान में जलते सूरज को ?
जिसके जलते हुए सीने की तपीश
हमें धरती तक महसूस होती है।
शायद़ वो भी अकेला है मेरी ही तरहं..
........................... बहुत अकेला।
और ऐसी ही होती है अकेलेपन की जल़न।।


Thursday, September 22, 2011

वो चली गई

उसने मुझसे कहा कि - वो जा रही है,
कभी ना वापिस आने के लिए।
एक ऐसे सफर पर
जिसका रास्ता मेरी गली से होकर नही गुजरता।

उसने नम ऑंखों से मुझको देखा,
और मैने खाली ऑखों से उसको।
वो कुछ पलों की खामोशी सब कह गई,
और टूटते दिलों की चीखें उसमें दबकर रह गई।

मैने कहा उससे कि-
तुम्हारे बिना मै कैसे जी सकता हूँ,
ये गुनाह है मेरे लिए,
मैं इसे कैसे कर सकता हूँ।

लेकिन शब्दों और भावनाओं की जंग में,
जीत हमेशा भावनाओं की ही होती है।
शायद मेरे शब्द झूठे थे,
और उसके ज्जबात सच्चे।

और वो चली गई,
कभी ना वापिस आने के लिए।
अपनी ही तलाश में,
खुद को पाने के लिए,

छोड गई मुझको अकेला,
अपनी तन्हाई के साथ,
अपने झूठे शब्दों के साथ,
अपनी बेबफाई के साथ।

और आज मैं अपनी तन्हाई में,
इस कदर खो गया हूँ,
सांसे तो चल रही हैं

पर मुर्दा हो गया हूँ ।