Thursday, September 22, 2011

वो चली गई

उसने मुझसे कहा कि - वो जा रही है,
कभी ना वापिस आने के लिए।
एक ऐसे सफर पर
जिसका रास्ता मेरी गली से होकर नही गुजरता।

उसने नम ऑंखों से मुझको देखा,
और मैने खाली ऑखों से उसको।
वो कुछ पलों की खामोशी सब कह गई,
और टूटते दिलों की चीखें उसमें दबकर रह गई।

मैने कहा उससे कि-
तुम्हारे बिना मै कैसे जी सकता हूँ,
ये गुनाह है मेरे लिए,
मैं इसे कैसे कर सकता हूँ।

लेकिन शब्दों और भावनाओं की जंग में,
जीत हमेशा भावनाओं की ही होती है।
शायद मेरे शब्द झूठे थे,
और उसके ज्जबात सच्चे।

और वो चली गई,
कभी ना वापिस आने के लिए।
अपनी ही तलाश में,
खुद को पाने के लिए,

छोड गई मुझको अकेला,
अपनी तन्हाई के साथ,
अपने झूठे शब्दों के साथ,
अपनी बेबफाई के साथ।

और आज मैं अपनी तन्हाई में,
इस कदर खो गया हूँ,
सांसे तो चल रही हैं

पर मुर्दा हो गया हूँ ।